दो पल के लिए आँखें बंद की ही थी कि हवाओं ने बात करना शुरू कर दिया।
दगा करने के बाद भी शायद नाराज थी मुझसे क्योंकि जब मेरे गालों को छू कर निकली तब कुछ ठंडी बूँदें छोड़ गई थी, उसके वो आँसू तो कब के निकल गए थे पर अभी तक उन्हें समेट कर रखा था।
उसकी सिसकियाँ बस शब्द की रचना कर रही थीं, मैं अनभिज्ञ था उनसे, अर्थ समझ नहीं आ रहा था पर भावनाओं के अनुवादक ने इसे पढ़ लिया था। वो समझा नहीं पा रही थी मुझे की आखिर ऐसा क्यों किया उसने, क्या कमी था मेरे चाहत में, वो आखें नहीं मिला पा रही थी, कुछ देर देखता रहा था मै जब जाने लगा तब उनकी सचाई सामने आई फिर क्या ,,
“अनजानी अनसुनी क़यामत “
ना आह सुनाई दी, ना तङप दिखाई दी ,,,फना हो गये उसके इश्क में, बङी खामोशी के साथ
मैं बेबस रहा।
पलकें उठने के लिए अंगड़ाई लेने लगी थी, समय अलविदा कहने का था पर मै पहले ही वहा से जाने के लिय मुड़ चूका था बिना कुछ कहे। बस ये सोचा ,,यूँ इस दिले नादाँ से रिश्तों का भरम टूटा, वो झूठी क़सम टूटी या झूठा सनम टूटा ।
गला रुँध गया था, शब्दों की कीमत खतम हो गई थी, खामोशियों ने मातम मनाना शुरू कर दिया था।
मैं जाने के लिए लौटा, उसकी कुछ निशानी लिए और हाँ उसके वो आँसू भी अब मेरे गालों पर से सूख चुके थे।
बस यूँ ही चलते चलते.. वैसे भी कहा गया है की मुहब्बत की दहलीज का उसूल है मुड़कर देखोगे तो आँखें भर आयेंगी,, तब से मुड़कर देखा नहीं बस चलता जा रहा हु अपनी धुन में, जब भी थकता हु वो बीते लम्हे याद आकर थकान मिटाती है, जहा भी हो खुस रहना, तुम्हारी हँसी अभी भी मुझे भाति है|






