Saturday, 18 April 2015

अनजानी अनसुनी क़यामत

दो पल के लिए आँखें बंद की ही थी कि हवाओं ने बात करना शुरू कर दिया।
दगा करने के बाद भी शायद नाराज थी मुझसे क्योंकि जब मेरे गालों को छू कर निकली तब कुछ ठंडी बूँदें छोड़ गई थी, उसके वो आँसू तो कब के निकल गए थे पर अभी तक उन्हें समेट कर रखा था।

उसकी सिसकियाँ बस शब्द की रचना कर रही थीं, मैं अनभिज्ञ था उनसे, अर्थ समझ नहीं आ रहा था पर भावनाओं के अनुवादक ने इसे पढ़ लिया था। वो समझा नहीं पा रही थी मुझे की आखिर ऐसा क्यों किया उसने, क्या कमी था मेरे चाहत में, वो आखें नहीं मिला पा रही थी, कुछ देर देखता रहा था मै जब जाने लगा तब उनकी सचाई सामने आई फिर क्या ,, 

“अनजानी अनसुनी क़यामत “



ना आह सुनाई दी, ना तङप दिखाई दी ,,,फना हो गये उसके इश्क में, बङी खामोशी के साथ
मैं बेबस रहा।
पलकें उठने के लिए अंगड़ाई लेने लगी थी, समय अलविदा कहने का था पर मै पहले ही वहा से जाने के लिय मुड़ चूका था बिना कुछ कहे। बस ये सोचा ,,यूँ इस दिले नादाँ से रिश्तों का भरम टूटा, वो झूठी क़सम टूटी या झूठा सनम टूटा ।
गला रुँध गया था, शब्दों की कीमत खतम हो गई थी, खामोशियों ने मातम मनाना शुरू कर दिया था।
मैं जाने के लिए लौटा, उसकी कुछ निशानी लिए और हाँ उसके वो आँसू भी अब मेरे गालों पर से सूख चुके थे।

बस यूँ ही चलते चलते.. वैसे भी कहा गया है की मुहब्बत की दहलीज का उसूल है मुड़कर देखोगे तो आँखें भर आयेंगी,, तब से मुड़कर देखा नहीं बस चलता जा रहा हु अपनी धुन में, जब भी थकता हु वो बीते लम्हे याद आकर थकान मिटाती है, जहा भी हो खुस रहना, तुम्हारी हँसी अभी भी मुझे भाति है|

Wednesday, 1 April 2015

प्रभावशाली व्यक्तियों के अनमोल विचार


अनमोल बचन 



जिसे पुस्तकें पढ़ने का शौक हैवह सब जगह सुखी रह सकता है।
महात्मा गांधी
सितारों तक हम भले ही न पहुँच सकेलेकिन उनकी तरफ निगाह तो रहनी ही चाहिए।
नेहरू
जो यह सोचकर भयभीत रहता है कि कहीं हार न जाए वह निश्चित रूप से हारेगा।
नेपोलियन
नवयुवकों के लिए मेरा संदेश तीन शब्दों में हैपरिश्रमपरिश्रमपरिश्रम।
विस्मार्क
सम्भव असम्भव से पूछता है—‘तुम्हारा निवास स्थान कहां है ?’ —‘निर्बलों के स्वप्नों में
टैगोर
भाग्य के भरोसे बैठे रहने पर भाग्य सोया रहता है और हिम्मत बॉधकर खडे़ होने पर भाग्य भी उठ खड़ा होता है।
अज्ञात
अपने जीवन का एक लक्ष्य बनाओ और इसके बाद अपना सारा शारीरिक और मानसिक बलजो ईश्वर ने तुम्हें दिया हैउसमें लगा दो।
कार्लाइल
असफलता से वही अछूता हैजो कोई प्रयास नहीं करता।
व्हेटल



अपने सामने एक ही साध्य रखना चाहिए। उस साध्य के सिद्ध होने तक दूसरी किसी बात की ओर ध्यान नहीं देना चाहिए। रातदिन सपने तक में उसी की धुन रहे, तभी सफलता मिलती है।
स्वामी विवेकानन्द

चापलूसी करने वाले से सदा बचे रहो, वह बड़ा भारी चोर होता है। वह तुम्हें मूर्ख बनाकर तुम्हारा समय भी चुराता है और बुद्धि भी।
आचार्य चाणक्य

जीवन कितना ही छोटा हो, समय की बर्बादी से वह और भी छोटा बना दिया जाता है।
जॉनसन

समय की प्रतीक्षा सब करते हैं, किन्तु उससे लाभ उठाना बुद्धिमानों का ही काम है।
उमाशंकर

मन का संकल्प जो स्वीकार कर ले, वही घटित होना शुरू हो जाता है।
आचार्य रजनीश

सफलता मिलती है समझदारी और परिश्रम से। यदि तुम्हें चढ़ना है, तो दोनों को अपना लो।
माध

पीछे के अनुभव से जो लाभ नहीं उठाते, वे भविष्य को बना नहीं सकते, जो भविष्य में दूर तक नहीं देखता, वह ठोकर खाकर गिर पड़ता है।
गुरूदत्त

प्रत्येक विचार, प्रत्येक कर्म का फल अवश्य मिलता है। अच्छे का अच्छा और बुरे का बुरा। यही प्रकृति का नियम है। इसमें देर हो सकती है पर अंधेर नहीं। इसलिए अगर आप सफल होना चाहते हैं, तो अच्छे विचार रखिए, सद्कर्म करिये और जरूरतमंदों की निस्वार्थ भाव से सहायता तथा सेवा करिये। मार्ग में आने वाली कठिनाइयों, बाधाओं और दूसरों की कटु आलोचनाओं से अपने मन को अशांत न होने दीजिये।
स्वेट मार्डेन

उस व्यक्ति के लिए कुछ भी असम्भव नहीं है, जो संकल्प कर सकता है और फिर उस पर आचरण कर सकता है, सफलता का यही नियम है।
मोराबी

कष्ट ही तो वह प्रेरक शक्ति है जो मनुष्य को कसौटी पर परखती है और आगे बढ़ाती है।
सावरकर

सही स्थान पर बोया गया सुकर्म का बीज ही महान फल देता है।
कथा सरित्सागर

यदि असंतोष की भावना को लगन व धैर्य से रचनात्मक शक्ति में न बदला जाए तो वह ख़तरनाक भी हो सकती है।
इंदिरा गांधी

बाधाएँ व्यक्ति की परीक्षा होती हैं। उनसे उत्साह बढ़ना चाहिए, मंद नहीं पड़ना चाहिए।
यशपाल

जंज़ीरें, जंज़ीरें ही हैं, चाहे वे लोहे की हों या सोने की, वे समान रूप से तुम्हें गुलाम बनाती हैं।
स्वामी रामतीर्थ

जय उसी की होती है जो अपने को संकट में डालकर कार्य संपन्न करते हैं। जय कायरों की कभी नहीं होती।
जवाहरलाल नेहरू

Friday, 10 October 2014

परी मेरे सपनों की



अपने हृदय से लगाकर सुला देती थी माँ पीठ थपथपाकर
मेरी आखे बंद हो जाती पर नादान मै जगता रहता सोकर

आखे बंद वो आई, आते आते मुझे गुदगुदी लगाई
बहुत गन्दी थी वो, ना जागता तो करती थी पिटाई
मजबूरी में आखे खोलू ओ कहती मुझे गोलू मोलू
साथ खेलने को थी अड़ी, वो रखती थी जादू की छड़ी

अपने हृदय से लगाकर सुला देती थी माँ पीठ थपथपाकर
मेरी आखे बंद हो जाती पर नादान मै जगता रहता सोकर

स्वर्ग का सैर कराती ह्वावो में उड़ाती नदियों में तैराती
थक के चूर होता खेलखेल कर, तब भुखु मुझको आती
जादू की छड़ी से मिठाइयाँ लाकर प्यार से मुझे खिलाती
जाती जब चूम कर मुझको सच में आखो को बहुत रुलाती

अपने हृदय से लगाकर सुला देती थी माँ पीठ थपथपाकर
मेरी आखे बंद हो जाती पर नादान मै जगता रहता सोकर

बंद आखो में सिर्फ ओ होती थी आखे खोलो तो सब होते साथ
मुझे सब कहते ओ सपना थी अब बड़ा हुआ तो वो छोड़ गयी
अकेले अक पल नही गुजरथा था उसका पकड़ क चलती मेरा हाथ
सज़ा दि या गैरो से की सपनों का सौदा और दिल मेरा तोड़ गयी

जो महज सिर्फ सपना था जो होना न कभी अपना था
बरसो से आस थी कब दीदार हो उस वक्त की तलाश थी

अपने हृदय से लगाकर सुला देती थी माँ पीठ थपथपाकर
मेरी आखे बंद हो जाती पर नादान मै जगता रहता सोकर

समय बदला समझ आई, दिल पर गम की काल्ली बदलिया छाई
धुढ रहा उस सपनो की परी को मेरी निगाहे तेरी आखो से टकराई

अचम्भित हुआ देखर पर वो काजल वाली आखों से पहचाना
चुपके से सिराहने बैठकर देखता रहा तुझे बनके अनजाना
वो प्यारी बचपन की आखें आज प्यार का समुन्द्र बना है
ऐसे तिरछी निगाहों से डराकर कह रही हसे छूना मना है

इनके रेशम सी बालो का दीवाना था मेरा बचपन भी
कानो में मोतियों पहनी बैठकर कोने में खीच रही सेल्फी
लिवास और होठो का रंग एकदूजे से कर रहा मिलन

मद की नशे में लग रही थी आखें जो देखे हो जाए शराबी
वस्त्र गुलाब के रंग का उपर से मदिरामयी उनके होठ गुलाबी
सोचा आज बया करूंगा परी से अपनी पुरानी जज्बात
ये क्या हुआ फिर आखें खुली देखा तो बाकी थी रात
ओ भी सपना और ये भी सपना
सायद कोई नही किस्मत में अपना
सच्चे थे वो दिन जब
अपने हृदय से लगाकर सुला देती थी माँ पीठ थपथपाकर
मेरी आखे बंद हो जाती पर नादान मै जगता रहता सोकर

 "गौरव दुबे "

Sunday, 14 September 2014

मिलकर तुमसे ये सोचा


मिलकर तुमसे ये सोचा
तुम्हारी रुह के बन्धन मेँ होने का,
मिलकर तुमसे ये सोचा
तुम्हारी साँस के माले पिरोने का..
मैँ एक नन्हाँ सा लम्हा हूँ, जो तेरे पल मेँ जिन्दा हूँ,
मिलकर तुमसे ये सोचा
इसी लम्हे को जीवन भर सँजोने का..
मैँ जिन्दा हूँ तो जिन्दा हूँ तुम्हारी इक हँसी खातिर..
है थोड़ा मन..इसी ख्वाहिश मेँ सारी उम्र खोने का..
मुझे अच्छे नहीँ लगते तुम्हारी आँख मेँ आँसू..
मिलकर तुमसे ये सोचा
मेरी आँखो मे तेरा अश्क ढोने का..
खुले जो नीँद मेरी, हर सुबह बस तू दिखाई दे..
मिलकर तुमसे ये सोचा
इसी उम्मीद मेँ हर रात सोने का..
मरुँ मैँ तो, तुम्हारी गोद मेँ सिर रख के मर जाऊँ..
मिलकर तुमसे ये सोचा
इसी जन्नत मेँ मेरा अन्त होने का...


“गौरव दुबे ”

Tuesday, 9 September 2014

खता हो गयी मुझसे - "गौरव दुबे "






















खता  हो गयी मुझसे की जो तुजसे नज़रे न मिला पाए ,
बेवफा हमें क्या पता था तुम यूँ रुसवा होके निकलोगे !

खता  हो गयी मुझसे की जो तुझपे विस्वास कर गए ,
बेवफा हमें क्या पता था तुम्ही दगा दिल से  करोगे !


खता  हो गयी मुझसे की जो तुमको अपना दिल सुपुर्द किया ,
बेवफा हमें क्या पता था तुम्ही बेवफा सनम निकलोगे !


खता  हो गयी मुझसे की जो तुम्हारा यूँ  रस्ता तकते रहे ,
बेवफा हमें क्या पता था तुम्ही सजा ए इन्तजार  दोगे !


खता  हो गयी मुझसे की जो तुझको अपनी जान तेरे नाम किया  ,
बेवफा हमें क्या पता  था  तुम्ही कातिले ए जान निकलोगे !


"गौरव दुबे "

Monday, 1 September 2014

तुम देना साथ मेरा

कुछ क्षण आते हैं ज़िंदगी में जब लगता है कि इससे बुरा और कुछ नहीं हो सकता। कुछ समय बाद कुछ उससे भी बुरा दिखता है तो लगता है पहले हम कितने गलत थे। जो हुआ वह इतना भी गलत नहीं था। जितना था वह झेला जा सकता था। काश! सबकी ज़िंदगी में कुछ ऐसे रिश्ते होते जो उस बुरे क्षण के बीत जाने तक हमारा साथ देते। ऐसा होता तो लोग बेघर न होते, आत्महत्या न करते। आज सब अपने में इतने मस्त हैं कि उन्हें लगता ही नहीं कि उन्हें भी किसी की ज़रूरत पड़ सकती है। स्वार्थ में इंसान को दूसरा दिखाई ही नहीं देता। ऐसे ही लोग आत्महत्या करने के कगार पर पहुँच जाते हैं।
लोगों के साथ उनके दुख के क्षणों में खड़े हों, ताकि आपके दुख में लोग आपके साथ आयें। साथ का मतलब कुछ करना ही नहीं होता। कई बार केवल बातों से या केवल साथ खड़े होकर ही आप किसी को जीवन दे सकते हैं।

Wednesday, 25 December 2013

जन्मदिन की बधाई

हिंदुस्तानी राजनीति के आखिरी करिश्माई नेता हैं अटल बिहारी वाजपेयी यानि एक ऐसा नाम जिसने भारतीय राजनीति को अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से इस तरह प्रभावित किया जिसकी मिसाल नही|
"" आपको जन्मदिन की बहुत शुभकामनाये ""

उनके द्वारा लिखित ये कविता सभी देशवाशियों के रग रग में होता है |

टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते

सत्य का संघर्ष सत्ता से
न्याय लड़ता निरंकुशता से
अंधेरे ने दी चुनौती है
किरण अंतिम अस्त होती है

दीप निष्ठा का लिये निष्कंप
वज्र टूटे या उठे भूकंप
यह बराबर का नहीं है युद्ध
हम निहत्थे, शत्रु है सन्नद्ध
हर तरह के शस्त्र से है सज्ज
और पशुबल हो उठा निर्लज्ज

किन्तु फिर भी जूझने का प्रण
अंगद ने बढ़ाया चरण
प्राण-पण से करेंगे प्रतिकार
समर्पण की माँग अस्वीकार

दाँव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते
टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते