Thursday, 13 June 2013

रूप की मधुशाला

             रूप की मधुशाला

ये सनम किस लज्बो में करू बया,
तेरे बेपनाह हुस्न का ये गजब ढाया है

बन जा साकी मेरे दिल का हमनशी,
आज तेरी मदभरी आखों में मैंने मधुशाला पाया है

आज डूब जानना है इस पैमाने में,
ये सोच के इश्क तेरी चौखट पे चला आया है

कोई और न पि ले तेरे होठो से जाम को ,
बंद किया पलकों में तुझे दुनिया से छुपाया है

ऐसे पिलाओ जिंदगी जिंदादिल हो जाये,
घुट घुट के टुकडों में पीकर मुर्दादिलो ने क्या पाया है

नशे में चूर लडखडाउ मै संभालना मुझको,
वरना छोड़ देते है दुनिया वाले मैंने आजमाया है

ये सनम किस लज्बो में बया करू ,
तेरे बेपनाह हुस्न को ये गजब ढाया है


                                                  (गौरव दुबे )