Sunday, 15 December 2013

सोचा है तुझे


 
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सोचा है तुझे

सूरज की लालिमा रौशनी में देखा एक लड़की को
हाथ में उपलब्धियों का कुछ सौगात है पकड़ी वो

जिसके चेहरे में सिमटी हो सफलता की अनोखी राज
सोचा टूटी फूटी लब्जो से करू उसकी तारीफ आज

प्रभावित हुआ इससे है अदभुत अद्वितीय असाधारण
कर्मठ है अपने काम में तभी सफलता चूमती कदम

वस्त्र पहनी है पूर्ण भारतीय नारी की और साधारण सृंगार
पर आधुनिक सोच है इसके अच्छे ख्यालात अच्छे विचार

बेहद खुबसूरत है इनकी आखें किसी का भी दिल धड़काये
मैंने अभी पढ़ा इसकी आखों को बहुत से है ये राज़ छुपाये

सुन्दर मन सुन्दर तन और सुंदर इसका स्वभाव है
सुने गले में अभी प्रियतम के मंगलसुत्र का अभाव है

सफ़ेद कुरता लिवास सादगी का काले रंग की ओढ़नी
प्रेम रूपी मिलन है दो रंगो का जैसे काली सफेद मोरनी

न जी भर के देखा हु उसको न जी भर के है बात हुई
दिल को लगाव है पर समझाया की वो नही अपनी कोई
तू शुभ है सरल है स्वक्ष है पावन है पवित्र है

आज गौरव है मुझे की तू इसका मित्र है

 "गौरव दुबे "

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